Tenant Rights : वर्तमान समय में मकान मालिकों एवं किराएदारों के बीच अक्सर किराए को लेकर ही ज्यादा विवाद देखा जाता है। वही इस मामले में आमतौर पर कई मकान मालिक मनमर्जी करते भी नजर आते हैं। ऐसे में किराएदार के लिए यह जानना बहुत ही जरूरी हो जाता है की मकान मालिक मनमर्जी से किराए बढ़ा सकते हैं। या नहीं आईए जानते हैं इस बारे में क्या है कानूनी प्रावधान।
बता दे की वर्तमान समय में बहुत सारे व्यक्ति अलग-अलग कारणों के चलते दूसरे शहरों में किराए के मकान पर रहते हैं। बता दे कि यह भी देखा गया है कि अक्सर मकान मालिक की ओर से किराए बढ़ाने के मामले में किराएदार के साथ नोक झोक होते रहते हैं।
वहीं कई किराएदारों को यह कंफ्यूजन भी बने रहते हैं कि क्या मकान मालिक को अपनी मर्जी से किराए बढ़ाने का अधिकार होता है। वही यह एक बहुत ही बड़ा सवाल भी है जिसके बारे में कानूनी प्रावधान जानना किराएदारों के लिए बहुत ही जरूरी हो जाता है। आईए जानते हैं नीचे की लेख में और जानकारी विस्तार से।
Tenant Rights : कानून में की किए गए अलग-अलग प्रावधान
बता दे की किराएदारी कानून में मकान मालिक और किराएदारों को अलग-अलग हक प्रदान करते हुए कई तरह के प्रावधान भी किए गए हैं। वही ऐसे में मकान मालिक की ओर से किराए बढ़ाने के नियम भी तय है। बता दे कि वह किराया बढ़ाने में मनमर्जी करते हैं तो किराएदार अपने अधिकारों का उपयोग करके उसे ऐसा करने से रोक सकते हैं।
Tenant Rights : नोटिस देकर करना होता है सूचित
बता दे की कानूनी प्रावधान के अनुसार मकान मालिक मनमर्जी से अचानक किसी भी समय प्रॉपर्टी या मकान का किराया नहीं बढ़ा सकते हैं। वहीं किराया बढ़ने से पहले किराएदार को एक से लेकर दो महीने पूर्व नोटिस देकर मकान मालिक सूचित करेंगे। वैसे हर राज्य में किराया बढ़ोतरी को लेकर नियमों में भिन्नता है। आईए और जानते हैं नीचे की लेख में पूरी जानकारी विस्तार से।
किराएदार अब कर सकते हैं विरोध
बता दे कि नियमानुसार हर साल मकान मालिक 5 से लेकर 10% की बढ़ोतरी कर सकते हैं। वहीं इसके अलावा किराएदार के लिए किए गए एग्रीमेंट पर भी यह निर्भर करते हैं कि इसमें किराया बढ़ाने की अवधि और राशि कितने लिखे गए हैं। वही मकान या प्रॉपर्टी की हालत खराब है तो किराएदार को किराया बढ़ोतरी का विरोध करने का पूरा अधिकार है।
किराए के लिए एग्रीमेंट करना रहता है फायदेमंद
बता दे कि किराए के लिए एग्रीमेंट करना किराएदार एवं मकान मालिक दोनों के लिए ही फायदेमंद रहते हैं। वही यह 11 महीने या इससे अधिक समय तक का भी हो सकता है। वही एग्रीमेंट में किराए बढ़ाने की अवधि एवं राशि लिखें जाते हैं।
बता दे की एग्रीमेंट में या जिक्र होने पर मकान मालिक मनमर्जी से जब चाहे तब किराया नहीं बढ़ा पाएंगे। वही किराएदार इस बात का भी ध्यान रखें कि एग्रीमेंट में कितना किराया बढ़ाए जाने की बात कहे गए हैं। वही किराए बढ़ते समय इससे किराया बढ़ोतरी राशि का मिलान कर लें।
मूलभूत सुविधाएं पाना किराएदार का अधिकार
बता दे की मकान की मरम्मत किए जाने पर मकान मालिक किराया बढ़ा सकते हैं। लेकिन इनकी भी सीमा है वही दिल्ली में मकान की रिनोवेशन करने पर प्रॉपर्टी मालिक 7.5 प्रतिशत किराया बढ़ा सकते हैं।
वही जब मकान खराब हालत में हो और सुविधाएं कम हो तो किराएदार किराया बढ़ोतरी का विरोध कर सकते हैं। वही मकान मालिक बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं देने से इनकार नहीं कर सकते हैं। बता दें की ये मूलभूत सुविधाएं पाना किरदार का पूरा अधिकार होता है।