Retirement Age Hike : सरकारी नौकरी करने वालों के लिए रिटायरमेंट यानी सेवानिवृत्ति की उम्र हमेशा से ही एक अहम मुद्दा रहा है। सोशल मीडिया पर इन दिनों तेजी से खबरें फैल रही हैं कि अब रिटायरमेंट की उम्र 60 नहीं, बल्कि 62 या 65 साल कर दी गई है। बहुत से लोग इस खबर को सच मानकर आगे शेयर भी कर रहे हैं। लेकिन असलियत क्या है? क्या वाकई अब सरकारी कर्मचारी 60 के बाद भी नौकरी कर पाएंगे? आइए इस पूरी खबर को आसान भाषा में समझते हैं।
Retirement Age Hike : क्या सच में बदली है रिटायरमेंट की उम्र?
सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि फिलहाल केंद्र सरकार की तरफ से रिटायरमेंट की उम्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अभी भी केंद्र सरकार के सभी विभागों और मंत्रालयों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 60 साल ही तय है। यानी जैसे अब तक होता आया है, वैसे ही आगे भी 60 की उम्र पूरी होते ही कर्मचारी को सेवानिवृत्त किया जाएगा।
हालांकि पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर यह बात वायरल हुई कि अब रिटायरमेंट की उम्र 62 या 65 साल हो गई है। इस खबर के चलते कर्मचारियों में हलचल मच गई थी। लेकिन सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और संसद में दिए गए बयानों में भी इसकी पुष्टि की गई है।
Retirement Age Hike News : कुछ राज्यों में अलग नियम
जहां केंद्र सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया है, वहीं कुछ राज्य सरकारों ने जरूर रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई है। जैसे कि आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 कर दी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की रिटायरमेंट एज 62 साल और मेडिकल टीचर्स की 65 साल कर दी गई है।
कई राज्य अपने-अपने हिसाब से निर्णय लेते हैं, खासकर कुछ विशेष विभागों में जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए। इसका मकसद यह होता है कि अनुभवी लोगों की सेवाएं ज्यादा समय तक ली जा सकें, जिससे विभाग का कामकाज बेहतर ढंग से चलता रहे।
क्यों बढ़ाई जा सकती है उम्र?
रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने के पीछे कुछ ठोस कारण भी हैं। आज के समय में भारत में लोगों की औसत उम्र पहले से बढ़ चुकी है। अब लोग ज्यादा स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं। पहले जहां जीवन प्रत्याशा 61 साल थी, अब यह करीब 72 साल हो गई है। ऐसे में लोग 60 के बाद भी पूरी तरह काम करने के लायक रहते हैं।
इसके अलावा 60 साल की उम्र तक सरकारी कर्मचारी काफी अनुभव हासिल कर चुके होते हैं। अगर ये कर्मचारी थोड़े और सालों तक काम करते हैं तो सरकार को उनके अनुभव का लाभ मिलता है और कामकाज में सुधार होता है। साथ ही रिटायरमेंट लेट होने से सरकार की पेंशन देरी से शुरू होती है जिससे आर्थिक बोझ थोड़ा कम हो जाता है।
अगर रिटायरमेंट उम्र बढ़ी तो क्या होंगे फायदे?
अगर आने वाले समय में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ती है तो इसके कुछ फायदे भी हो सकते हैं। जैसे कि कर्मचारी को कुछ और सालों तक सैलरी मिलती रहेगी जिससे उनकी फाइनेंशियल स्थिति मजबूत हो सकती है। इसके साथ-साथ सरकार को भी अनुभवी स्टाफ का ज्यादा फायदा मिलेगा।
सरकार को पेंशन देने में थोड़ी देरी होगी जिससे सरकारी खर्च में थोड़ी राहत मिलेगी। साथ ही प्रशासनिक कामों में निरंतरता बनी रहेगी क्योंकि अनुभवी अफसर अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभा सकते हैं।
लेकिन कुछ नुकसान भी हो सकते हैं
जहां फायदे हैं, वहीं कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। अगर रिटायरमेंट की उम्र बढ़ा दी जाती है, तो नए युवाओं के लिए नौकरियों के मौके कम हो सकते हैं। जब पुराने कर्मचारी ज्यादा समय तक पद पर बने रहेंगे, तो नई भर्तियों की गुंजाइश घटेगी जिससे बेरोजगारी बढ़ सकती है।
इसके अलावा पदोन्नति यानी प्रमोशन का सिलसिला भी धीमा हो जाएगा। जो जूनियर कर्मचारी हैं, उन्हें सीनियर की जगह खाली होने में ज्यादा समय लगेगा। इससे युवाओं में असंतोष बढ़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल तो केंद्र सरकार ने रिटायरमेंट की उम्र में कोई बदलाव नहीं किया है। लेकिन यह मुद्दा समय-समय पर चर्चा में जरूर आता रहता है। कर्मचारी यूनियनें और कई समितियां इस विषय पर सरकार के सामने अपनी राय रखती रहती हैं।
अगर सरकार भविष्य में इस दिशा में कोई फैसला लेती है तो उम्मीद है कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। शुरुआत कुछ विशेष विभागों से होगी और फिर अगर प्रयोग सफल रहा, तो इसे और आगे बढ़ाया जाएगा।
क्या करें कर्मचारी?
जिन लोगों के मन में यह सवाल है कि अब उन्हें 60 की उम्र में रिटायर होना है या 62 या 65 की, उन्हें सलाह दी जाती है कि सिर्फ सोशल मीडिया की बातों पर भरोसा न करें। केवल सरकारी वेबसाइट या अधिकारिक घोषणाओं पर ध्यान दें।
अगर कभी भी रिटायरमेंट एज में बदलाव किया जाएगा, तो सरकार इसकी घोषणा जरूर करेगी और सभी को समय रहते जानकारी दी जाएगी।